हिंदी सिनेमा में कुछ कलाकार हुए हैं, जो भले ही अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन अपनेफैंस के दिलों में आज भी जिंदा हैं। इन कलाकारों की लोकप्रियता समय के साथ कम नहीं होती, बल्कि बढ़ते समय और नई पीढ़ी के साथ और मजबूत होती जाती है। देव आनंद भी इन्हीं कलाकारों में से एक थे, जिन्होंने सालों दर्शकों के दिलों पर राज किया। एक समय था जब देव आनंद को इंडस्ट्री का सबसे हैंडसम एक्टर कहा जाता था। जब वह निकलते थे, सड़कों पर फैंस की भीड़ जमा हो जाती थी। अपनी खास अदाकारी, अलग अंदाज, दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और यादगार गीतों के लिए पहचाने जाने वाले देव आनंद आज भी दर्शकों के बीच आज भी बेहद लोकप्रिय हैं। आज देव आनंद की 103वीं जयंती है, इस मौके पर उनके जीवन से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्सों और सदाबहार फिल्मों के बारे में बताते हैं।
देव आनंद का फिल्मी सफर
देव आनंद भारतीय सिनेमा के सदाबहार एक्टर होने के साथ-साथ स्टाइल आइकन भी थे। देव आनंद के करियर की बात करें तो उनके लिए फिल्मी सफर आसान नहीं था। एक समय था जब वह स्टैंप बेचकर गुजारा करते थे। फिर उन्हें एक फिल्म ‘हम एक हैं’ में काम करने का मौका मिला और यहीं से उनके फिल्मी सफर की भी शुरुआत हुई। अपने 6 दशक के लंबे फिल्मी सफर में उन्होंने बाजी, टैक्सी ड्राइवर, काला पानी से लेकर सीआईडी जैसी सफल फिल्मों में काम किया। आज देव आनंद की 103वीं जयंती है और अगर आप ये फिल्में देखना चाहते हैं तो यूट्यूब पर भी इन फिल्मों का लुत्फ उठा सकते हैं। ओटीटी प्लेटफॉर्म और यूट्यूब चैनलर अल्ट्रा प्ले और अल्ट्रा मीडिया एंड एंटरटेनमेंट पर उनके सिनेमाई सफर और सदाबाहर फिल्मों का लु्तफ उठा सकते हैं।
देव आनंद की यादगार फिल्में
इस खास प्रस्तुति में देव आनंद की कई लोकप्रिय फिल्में शामिल हैं। इनमें ‘असली नकली’, ‘तेरे घर के सामने’, ‘गाइड’, ‘सीआईडी’, ‘हम दोनों’, ‘जाली नोट’, ‘मंजिल’, ‘द रिटर्न ऑफ ज्वेल थीफ’, ‘टैक्सी ड्राइवर’, ‘वारंट’ और ‘बारिश’ जैसी फिल्में शामिल हैं। ये फिल्में देव आनंद के लंबे और विविधतापूर्ण फिल्मी सफर की अलग-अलग झलक पेश करती हैं। ये सभी फिल्में वह हैं, जिन्हें हिंदी सिनेमा में मील का पत्थर कहा जाता है। अल्ट्रा मीडिया एंड एंटरटेनमेंट के फाउंडर सुशील कुमार अग्रवाल ने देव आनंद को याद करते हुए कहा कि वह एक सदाबहार अभिनेता होने के साथ-साथ युवा ऊर्जा, स्टाइल और कहानी कहने के एक खास अंदाज का प्रतिनिधित्व करने वाला सुपरस्टार बताया।
बिना गॉडफादर बने हिंदी सिनेमा के ‘गाइड’
देव आनंद इंडस्ट्री के उन कलाकारों में से थे, जिन्होंने बिना किसी गॉडफादर के सिनेमा के सबसे ऊंचे शिखर तक का सफर तय किया। भारतीय सिनेमा पर एक छत्र राज करने वाले देव आनंद एक शानदार अभिनेता होने के साथ-साथ एक बेहतरीन निर्देशक, लेखक और फिल्म निर्माता भी थे। देव आनंद ने कई कलाकारों का करियर भी बनाया। देव आनंद का जन्म 26 सितंबर 1923 को हुआ था। उनका असली नाम धरमदेव पिशोरीमल आनंद था, जो उन्होंने फिल्मों में एंट्री के दौरान बदल लिया। उन्होंने लाहौर से इंग्लिश लिटरेचर की पढ़ाई की, शुरुआत में उन्होंने नौकरी की, लेकिन हमेशा से वह फिल्मों में काम करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने सब छोड़कर मुंबई की राह पकड़ ली।
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