Highlights
- संसदीय समितियों में बड़ा फेरबदल, राधामोहन सिंह पुन: रक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष चुने गए।
- BJP के सुधांशु त्रिवेदी बने कॉमर्स कमेटी अध्यक्ष, डोला सेन की जगह संभाली जिम्मेदारी।
- शशि थरूर, चरणजीत सिंह चन्नी, मुकुल वासनिक समेत कई विपक्षी नेता समितियों के अध्यक्ष बने रहेंगे।
नई दिल्ली: संसद की विभाग-संबंधी स्थायी समितियों का शनिवार को पुनर्गठन किया गया है। राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विभिन्न समितियों के अध्यक्षों में बदलाव किया। इस फेरबदल में तृणमूल कांग्रेस से दो अहम संसदीय समितियों की अध्यक्षता चली गई। कॉमर्स कमेटी की कमान BJP के सुधांशु त्रिवेदी को दी गई है, जबकि केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स कमेटी की अध्यक्ष काकोलि घोष दस्तीदार बनी हैं।
राधामोहन सिंह बने डिफेंस कमिटी के अध्यक्ष
बीजेपी नेता राधामोहन सिंह को एक बार फिर रक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष के रूप में चुना गया है। इस बारे में आभार व्यक्त करते हुए सिंह ने कहा,
‘रक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष के रूप में पुनः दायित्व प्रदान किए जाने पर मैं आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी एवं माननीय लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला जी के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। राष्ट्र की सुरक्षा, सशस्त्र सेनाओं की क्षमता के सुदृढ़ीकरण तथा रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता जैसे महत्वपूर्ण विषयों से जुड़े इस दायित्व को मैं संसदीय गरिमा, पूर्ण निष्ठा और राष्ट्रहित की सर्वोच्च भावना के साथ निभाने के लिए प्रतिबद्ध हूं। यह दायित्व मेरे लिए सम्मान के साथ-साथ राष्ट्रसेवा का एक महत्वपूर्ण अवसर है।’
कॉमर्स कमेटी में सुधांशु त्रिवेदी की एंट्री
BJP के सुधांशु त्रिवेदी को संसदीय वाणिज्य समिति का नया अध्यक्ष बनाया गया है। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की डोला सेन की जगह ली है। वहीं, केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स से जुड़ी समिति की जिम्मेदारी तृणमूल कांग्रेस के बागी धड़े की नेता काकोली घोष दस्तीदार को मिली है। उन्होंने अपने पूर्व पार्टी सहयोगी कीर्ति आजाद की जगह ली है।
DMK के दो नेताओं को फिर मिली कमान
DMK सांसद तिरुचि शिवा और कनिमोझी को भी उनकी-उनकी संसदीय समितियों का अध्यक्ष फिर से नियुक्त किया गया है। तिरुचि शिवा इंडस्ट्री कमेटी और कनिमोझी फूड, कंज्यूमर अफेयर्स एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन कमेटी की अध्यक्ष बनी रहेंगी। इस पुनर्गठन में BJP के प्रमुख सहयोगी दलों JDU, शिवसेना और TDP के नेताओं को भी अलग-अलग समितियों की अध्यक्षता पर बरकरार रखा गया है।
विपक्ष के कई चेहरों को भी जिम्मेदारी बरकरार
फेरबदल के बावजूद विपक्ष के कुछ प्रमुख नेताओं की जिम्मेदारियां नहीं बदली गई हैं। कांग्रेस के शशि थरूर विदेश मामलों की समिति और चरणजीत सिंह चन्नी कृषि समिति के अध्यक्ष बने रहेंगे। कांग्रेस के मुकुल वासनिक को शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल से जुड़ी समिति की जिम्मेदारी पर बरकरार रखा गया है। समाजवादी पार्टी के राम गोपाल यादव स्वास्थ्य और परिवार कल्याण समिति के अध्यक्ष बने रहेंगे।
इन नेताओं को भी मिली अहम जिम्मेदारी
JDU के संजय कुमार झा को परिवहन, पर्यटन और संस्कृति समिति के अध्यक्ष पद पर फिर नियुक्त किया गया है। शिवसेना के श्रीरंग बारणे ऊर्जा समिति के अध्यक्ष बने रहेंगे। वहीं, BJP के सुजीत कुमार ने अपने ही पार्टी सहयोगी बृजलाल की जगह कार्मिक, लोक शिकायत, कानून और न्याय समिति की कमान संभाली है। पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर को कोयला, खान और इस्पात संबंधी संसदीय समिति का अध्यक्ष फिर बनाया गया है। BJP के राजीव प्रताप रूडी जल संसाधन समिति के अध्यक्ष पद पर बने रहेंगे। वहीं, BJP के भर्तृहरि महताब वित्त समिति की अध्यक्षता जारी रखेंगे। पार्टी के राधा मोहन दास अग्रवाल को गृह मामलों की समिति के अध्यक्ष पद पर बरकरार रखा गया है।
संचार और IT से रेलवे तक भी बदलाव
BJP के निशिकांत दुबे को संचार और सूचना प्रौद्योगिकी समिति का अध्यक्ष फिर नियुक्त किया गया है। महाराष्ट्र से BJP सांसद मेधा विश्राम कुलकर्णी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन समिति की अध्यक्ष बनी रहेंगी। रेलवे समिति में BJP के सुधीर गुप्ता ने पार्टी के सीएम रमेश की जगह ली है। वहीं, कांग्रेस के सप्तगिरी शंकर उलाका को ग्रामीण विकास और पंचायती राज समिति की अध्यक्षता फिर दी गई है।
संसद की स्थायी समितियां क्यों अहम हैं?
बता दें कि भारत में संसद की विभाग-संबंधी स्थायी समितियां अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों के कामकाज की जांच करती हैं। लोकसभा की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, ऐसी 24 विभाग-संबंधी स्थायी समितियां हैं और प्रत्येक में 31 सदस्य होते हैं जिनमें 21 लोकसभा और 10 राज्यसभा से होते हैं। इन समितियों का कार्यकाल सामान्य तौर पर एक साल तक होता है। (PTI से इनपुट्स के साथ)
ये भी पढ़ें: तृणमूल कांग्रेस चुनाव चिह्न विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग को 4 महीने में फैसला लेने का निर्देश









