Highlights
- कॉकपिट में मारपीट के बाद 2 अतिरिक्त पायलटों ने संभाली थी विमान की कमान।
- एक पायलट यात्रियों की भीड़ के ऊपर से कॉकपिट तक पहुंच गया था।
- करीब 45 मिनट बाद विमान को सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतारा गया।
जेरूसलम: फ्लाईदुबई विमान को हादसे से बचाने वाले 2 पायलट अब भी रहस्य बने हुए हैं। घटना के 3 दिन बाद शनिवार तक उनकी सार्वजनिक पहचान सामने नहीं आई थी। फ्लाईदुबई ने सिर्फ इतना बताया है कि दोनों ड्यूटी पर तैनात चालक दल के सदस्य थे और उसी विमान में यात्री के तौर पर सफर कर रहे थे। एयरलाइन ने अब तक यह नहीं बताया है कि इन दोनों की पहचान सार्वजनिक क्यों नहीं की गई।
2 अतिरिक्त पायलट उस विमान में क्यों थे?
विमान में सवार यात्री डेनियल श्लिख्टर ने पूरी घटना के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि यह किसी चमत्कार से कम नहीं था कि विमान में दो अतिरिक्त पायलट मौजूद थे। उनके मुताबिक, दोनों पायलट इसलिए विमान में थे क्योंकि उन्हें तेल अवीव से विमान को वापस दुबई ले जाना था। विमान में इस तरह अतिरिक्त चालक दल के सदस्यों का यात्री के तौर पर सफर करना ‘डेडहेडिंग’ कहलाता है।
कॉकपिट में हो रही थी खतरनाक मारपीट
श्लिख्टर विमान की दूसरी कतार में बैठे थे। उन्होंने बताया कि यात्रियों ने कॉकपिट से चीख-पुकार सुनी और पता चला कि को-पायलट कप्तान पर लगातार हमला कर रहा है। वहां चारों तरफ खून दिखाई दे रहा था। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कप्तान स्मित मच्छार ने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया। इसके बाद एक यात्री ने को-पायलट हमाम अल-हमामी को पकड़कर बाहर खींच लिया और दूसरे यात्रियों ने उसे काबू में करने की कोशिश शुरू कर दी।
डेनियल श्लिख्टर ने घटना के बारे में विस्तार से बात की।
भीड़ के ऊपर से कॉकपिट में पहुंच गया पायलट
इसी दौरान विमान में मौजूद एक अतिरिक्त पायलट तेजी से कॉकपिट की ओर बढ़ा। श्लिख्टर के मुताबिक, वह उन लोगों के ऊपर से लगभग छलांग लगाते हुए कॉकपिट तक पहुंचा, जो आरोपी को पकड़कर काबू में करने की कोशिश कर रहे थे। उसने तुरंत पायलट की सीट के पास पहुंचकर विमान के नियंत्रण अपने हाथ में ले लिए। इसके बाद दूसरा अतिरिक्त पायलट भी कॉकपिट में पहुंच गया और दोनों ने दरवाजा बंद कर लिया।
‘उन्होंने विमान संभाल लिया, हम उनकी वजह से जिंदा हैं’
श्लिख्टर ने कहा कि पहले कॉकपिट में पहुंचने वाले पायलट ने बिल्कुल हीरो की तरह काम किया। उन्होंने कहा,
‘उसने विमान की कमान संभाली और ऐसा लगा जैसे उसे ठीक-ठीक पता था कि क्या हो रहा है। मुझे लगता है कि हमारी जान बचाने में उसका योगदान विमान में मौजूद दूसरे नायकों जितना ही है।’
हालांकि, कॉकपिट का दरवाजा बंद होने के बाद यात्रियों को पता नहीं था कि अंदर दोनों पायलट वास्तव में क्या कर रहे हैं।
विमान को संभालने में लगे 10 मिनट से ज्यादा
विमान बेहद तेजी से नीचे गिरा था और इस दौरान उसके रडर का एक हिस्सा तक टूट गया था। दोनों पायलटों को विमान को स्थिर करने में काफी समय लगा। श्लिख्टर के मुताबिक, इसमें करीब 10 मिनट या उससे ज्यादा समय लग सकता है। इस दौरान विमान में मौजूद लोगों ने बेहद तनावपूर्ण हालात का सामना किया। आखिरकार विमान की ओर से ‘मेडे’ यानी आपातकालीन संदेश भेजा गया और सुरक्षित उतरने के लिए जगह तलाशने की कोशिश शुरू हुई।
यात्रियों को लगा कहीं विमान हाईजैक न हो जाए
विमान को स्थिर करने के बाद भी दोनों पायलटों ने यात्रियों से तुरंत कोई बातचीत नहीं की। इससे कुछ यात्री और ज्यादा चिंतित हो गए। श्लिख्टर ने बताया कि उन्हें डर लगने लगा था कि कहीं ये लोग विमान को हाईजैक करके ईरान की ओर न ले जाएं। उन्होंने कहा कि विमान उस क्षेत्र से ज्यादा दूर नहीं था, इसलिए यह डर उनके मन में आया।
45 मिनट बाद हुआ भरोसा, तबुक में उतरा विमान
करीब 45 मिनट बाद पायलटों ने यात्रियों को बताया कि विमान सऊदी अरब के तबुक में उतरेगा और सब कुछ ठीक हो जाएगा। इसके बाद श्लिख्टर ने उन पर भरोसा करने का फैसला किया। आखिरकार उनका भरोसा सही साबित हुआ और विमान तबुक में सुरक्षित उतर गया। बता दें कि घटना के बाद से फ्लाईदुबई की इस फ्लाइट के कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की जमकर तारीफ हो रही है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनसे बात की है। (AP से इनपुट्स के साथ)
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