नई दिल्ली: इंडिया टीवी के लोकप्रिय शो आप की अदालत में इस बार के मेहमान वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल थे। उन्होंने शो के एंकर और इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा के सवालों के खुलकर जवाब दिए। जब अनिल अग्रवाल से पूछा गया कि कबाड़ बेचते-बेचते उन्होंने कंपनी कैसे अक्वायर कर ली तो, उन्होंने बताया कि स्क्रैप का काम सबसे सरल था क्योंकि बाबूजी का भी एल्युमिनियम का कुछ काम था, तो उनके लिए ये सरल काम था। और मैं आदमी को पटा लेता था। मुस्कुरा दीजिए, हाथ मिला लीजिए, गले लगिए, कोई पान खाने वाला है तो पान खिला दीजिए।
जिस कंपनी से कबाड़ लेते थे, उसी को खरीद लिया
अनिल अग्रवाल ने कहा कि जिस कंपनी से मैं स्क्रैप लेता था, शमशेर स्टर्लिंग के नाम से कंपनी घाटकोपर में थी। उस दौरान, वो बैंकक्रप्ट हो गई थी। फिर मैं ख्वाब देखने लगा कि इसको ले लेते हैं। मन तो था लेकिन समस्या थी कि कैसे लें? फिर मैंने हिम्मत दिखाई, बातचीत की, इसमें एक से डेढ़ साल का समय लगा। वकील के पास गए, बैंक्स में गए। उसके बाद मैंने सोचा कि कंपनी तभी ले सकते हैं जब ओबेरॉय होटल में ठहरेंगे। लेकिन ओबेरॉय होटल में चेक-इन करने की समस्या थी। उस समय इसमें 200 रुपये के आसपास लगते थे। लेकिन हिम्मत नहीं थी कि वो दरबान जो खड़ा रहता था, वो अंदर जाने देगा कि नहीं। लेकिन जब शान बढ़ती है, तो हिम्मत भी आ जाती है। हिम्मत आई तो बैंक वाले से बात की। शाम को उसको ड्रिंक पर बुलाया। ड्रिंक पर भी बुलाया तो सिगरेट भी पी। उस समय विल्स सिगरेट ही पीते थे लेकिन पैकेट 555 का रखते थे। उसके अंदर से निकालकर विल्स पीते थे।
कंपनी लेने के चक्कर में ओबेरॉय होटल में ठहरे
उन्होंने आगे कहा कि कंपनी लेने के चक्कर में ओबेरॉय में ठहरा था। कंपनी लेने के लिए 15 से साढ़े 15 लाख रुपये कैश देना था। तब 5 लाख रुपये की बाबूजी ने मदद की थी। 5 लाख किसी और से लिए। 5 लाख रशीद भाई ने दिया और कंपनी के मालिक हो गए। जब आप में जोश होता है, जैसे हमारे यंग लोगों में है कि आगे बढ़ो ना, कुछ देख लेंगे। कोई रास्ता निकलेगा। मेरा अनुभव है कि लड़कियों में ज्यादा दम है।
300 करोड़ की कंपनी लंदन में 4 हजार करोड़ में लिस्ट कराई
अनिल अग्रवाल ने बताया कि आप कोई चीज ऐसी मत समझिए जो मैंने ट्राई नहीं की। ट्राई कर-करके आगे बढ़ता रहा। बहुत गलतियां भी कीं। इतना गलतियां कीं कि अब लगता है कि वो सब गलतियां नहीं करनी चाहिए थीं, लेकिन उससे सीखा। जैसे-जैसे गलती करते गए तो लंदन में बसे। अंग्रेजों के बीच में खड़े होकर अपने आपको तैयार किया। इधर, भारत में 2 साल में हमारी कंपनी 300 करोड़ की हो गई। फिर, इंडिया में कंपनी को डी-लिस्ट की और उसे लंदन ले गए। वहां मैंने उस कंपनी को 4 हजार करोड़ रुपये में लिस्ट करा दी। एक ही बात कहना चाहता हूं कि जितनी कहानी बनाएंगे, उतना आगे बढ़ेंगे। कहानी बनाना बहुत जरूरी है, झूठ मत बोलिए लेकिन उसी को घुमाइए। ‘आप की अदालत’ में अनिल अग्रवाल ने ये भी बताया कि उन्हें पैसे से बहुत प्यार है।









