नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना के स्वदेशी फाइटर जेट तेजस Mk1A की जल्द डिलीवरी की उम्मीदें अब बढ़ती नजर आ रही हैं। GE Aerospace ने सितंबर 2026 में चार और F404-IN20 इंजन हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को भेजे हैं। इसके साथ तेजस Mk1A programme के लिए अब तक भेजे गए इंजनों की संख्या 14 हो गई है। माना जा रहा है कि आगे भी हर महीने करीब चार इंजनों की सप्लाई जारी रहती है तो इससे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के उत्पादन कार्यक्रम को गति मिल सकती है।
अब हर महीने मिलेंगे चार इंजन
सबसे अहम बात यह है कि अब हर महीने करीब चार F404-IN20 इंजन मिलने की उम्मीद है। अगर यह सप्लाई इसी रफ्तार से जारी रहती है, तो HAL के तेजस Mk1A प्रोडक्शन प्रोग्राम को बड़ी रफ्तार मिल सकती है।दरअसल, तेजस Mk1A कार्यक्रम में लंबे समय से F404-IN20 इंजन की सप्लाई एक बड़ी चुनौती रही है। इंजन की उपलब्धता में देरी का असर विमान के उत्पादन और डिलीवरी शेड्यूल पर भी पड़ा है। ऐसे में नियमित इंजन सप्लाई HAL के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
इंजन सप्लाई में देरी से उत्पादन पर असर
इंजन सप्लाई में देरी की वजह से HAL के प्रोडक्शन शेड्यूल पर भी असर पड़ा। अब GE ने अपनी supply capability बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं और सितंबर में चार और engines भेजे हैं। HAL के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एयरक्राफ्ट के उत्पादन में इंजन की उपलब्धत अहम जरूरत है। नियमित इंजन सप्लाई शुरू होने से तैयार airframes को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
भारतीय वायुसेना के पास इस समय तेजस की दो ऑपरेशनल स्क्वाड्रन नंबर 45 स्क्वाड्रन ‘फ्लाइंग डैगर्स’ और नंबर 18 स्क्वाड्रन ‘फ्लाइंग बुलेट्स’ है। तेजस का पहला बड़ा प्रोडक्शन प्रोग्राम 40 एयरक्राफ्ट का था, 20 IOC और 20 FOC कॉन्फ़िगरेशन में यह अब पूरा हो चुका है।
83 तेजस Mk1A का पहला बड़ा ऑर्डर
भारतीय वायुसेना ने 2021 में करीब 48,000 करोड़ रुपये के समझौते के तहत 83 Tejas Mk1A विमानों का ऑर्डर दिया था। इनमें 73 सिंगल-सीट फाइटर और 10 ट्विन-सीट ट्रेनर विमान शामिल हैं। इनकी डिलीवरी मार्च 2024 से शुरू होने की योजना थी, लेकिन इंजन सप्लाई और अन्य certification संबंधी देरी के कारण कार्यक्रम प्रभावित हुआ। इस 83 विमानों के कार्यक्रम के लिए कुल 99 F404-IN20 इंजन का Contract किया गया था। इंजन सप्लाई में देरी के चलते HAL के उत्पादन कार्यक्रम पर दबाव बना रहा।
97 और Mk1A विमानों का भी ऑर्डर
इसके बाद सितंबर 2025 में भारतीय वायुसेना ने 97 और Tejas Mk1A विमानों के लिए दूसरा बड़ा Contract किया। करीब 62,370 करोड़ रुपये के इस सौदे में 68 सिंगल-सीट फाइटर और 29 ट्विन-सीट ट्रेनर विमान शामिल हैं। इनकी डिलीवरी 2027-28 से शुरू होकर छह साल में पूरी करने की योजना है। दोनों Contracts को मिलाकर भारतीय वायुसेना के लिए कुल 180 Tejas Mk1A विमान तैयार करने की योजना है। ऐसे में इंजन की नियमित उपलब्धता इस पूरे कार्यक्रम की रफ्तार के लिए बेहद अहम है।
तेजस की दो स्क्वाड्रन ऑपरेशनल
भारतीय वायुसेना के पास फिलहाल तेजस की दो ऑपरेशनल स्क्वाड्रन हैं-No. 45 Squadron ‘Flying Daggers’ और No. 18 Squadron ‘Flying Bullets’। तेजस Mk1 का पहला 40 विमानों का उत्पादन कार्यक्रम भी पूरा हो चुका है, जिसमें 20 IOC और 20 FOC कॉन्फिगरेशन वाले विमान शामिल थे।
अब आगे नजर 180 विमानों वाले बड़े Mk1A प्रोग्राम पर है। अगर GE Aerospace से F404-IN20 इंजनों की सप्लाई हर महीने करीब चार की रफ्तार से जारी रहती है, तो इससे HAL की प्रोडक्शन प्लानिंग को स्थिरता मिलेगी साथ ही Mk1A की डिलीवरी प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।
तेजस Mk2 पर भी नजर
Mk1A के साथ HAL और DRDO का अगला बड़ा फोकस Tejas Mk2 पर है। यह Mk1A से बड़ा और अधिक सक्षम मीडियम-वेट फाइटर कार्यक्रम है, लेकिन फिलहाल development phase में है। लेकिन Mk2 अभी development phase में है। इसकी टाइमलाइ में और देरी होती है तो वायुसेना की fighter fleet requirement के लिए alternative options पर भी चर्चा बनी रह सकती है।
वहीं Rafale या रूसी Su-57 जैसे विकल्पों को लेकर फिलहाल कोई औपचारिक फैसला नहीं हुआ है। इसलिए तत्काल प्राथमिकता Tejas Mk1A कार्यक्रम में इंजन सप्लाई और HAL की उत्पादन क्षमता बढ़ाने की है।









