मोरबी: “मोरबी में विधवाओं और बेसहारा लाभार्थियों का रजिस्टर: लंबे समय से पेंशन न मिलने पर कलेक्टर को कड़ा ज्ञापन”
गुजरात राज्य में, मोरबी के सामाजिक कार्यकर्ताओं में भारी गुस्सा है, क्योंकि विधवाओं और बेसहारा दिव्यांग लाभार्थियों को लंबे समय से पेंशन की राशि नहीं मिल रही है। इस मामले में, सामाजिक कार्यकर्ता राजूभाई दवे और उनकी टीम ने मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल, गृह राज्य मंत्री हर्षभाई संघवी और जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन लिखकर तत्काल पेंशन देने की मांग की है।
नेताओं की तनख्वाह 1 तारीख को, तो गरीबों की क्यों नहीं?
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपने ज्ञापन में सरकार के खिलाफ तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, “अगर सरकारी नेताओं और मंत्रियों की तनख्वाह हर महीने की 1 तारीख को जमा हो जाती है, तो फिर इन विधवाओं, दृष्टिहीनों और बेसहारा लोगों के साथ अन्याय क्यों हो रहा है? लंबे समय से आवेदन करने के बावजूद, इस गरीब तबके को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।”
ज्ञापन में कहा गया है कि कई लाभार्थियों के आवेदन मंजूर होने के बावजूद, राशि उनके बैंक या पोस्ट ऑफिस खाते में जमा नहीं की जा रही है। मोरबी जिले में कई परिवार इसी पेंशन पर निर्भर हैं। पेंशन रुक जाने के कारण, गरीब परिवारों के पास खाने-पीने, दवाइयों और घर का किराया देने के लिए पैसे नहीं हैं, जिससे उन्हें आर्थिक और मानसिक दोनों तरह से परेशानी झेलनी पड़ रही है।
15 दिन का अल्टीमेटम: कलेक्टर कार्यालय पर आंदोलन की तैयारी। राजूभाई दवे, जगदीशभाई बांभणिया और उनकी टीम ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर अगले 15 दिनों के भीतर रुकी हुई पेंशन की राशि लाभार्थियों के खातों में जमा नहीं की गई, तो सभी विधवाओं और दिव्यांगों के साथ मिलकर जिला कलेक्टर कार्यालय पर एक उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।
अगर इस आंदोलन के दौरान कोई अप्रिय घटना घटती है, तो उसके लिए पूरी तरह से राज्य सरकार जिम्मेदार होगी।
रुकी हुई पेंशन की राशि ब्याज सहित तत्काल जमा की जानी चाहिए। पेंशन में देरी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। भविष्य के लिए ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिससे हर महीने नियमित समय पर पेंशन मिल सके। अब यह देखना बाकी है कि संवेदनशील मानी जाने वाली सरकार, इस गरीब और बेसहारा तबके की पीड़ा सुनने के बाद कितनी जल्दी कार्रवाई करती है।









