“सबको मिले समान डिजिटल एक्सेस, सुरक्षा और अवसर”, उज्बेकिस्तान में 12वें IPU सम्मेलन में बोले राघव चड्ढा

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने उज्बेकिस्तान में आयोजित 12वें आईपीयू सम्मेलन में ‘डिजिटल युग में डिजिटल पहुंच और अधिकार’ विषय पर बात की। उन्होंने कहा कि एक अरब से अधिक लोगों के डिजिटल रूप से जुड़े होने और यूपीआई के जरिए तत्काल भुगतान के रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनने से भारत ने दिखाया है कि डिजिटल स्तर पर बड़े पैमाने का विस्तार और समावेशन साथ-साथ चल सकते हैं।

उन्होंने कहा कि तकनीक ऐसी होनी चाहिए जो बिना किसी को बाहर किए लोगों को जोड़े, बिना शोषण के नवाचार करे और बिना नियंत्रण के सुरक्षा प्रदान करे। राघव चड्ढा ने कहा कि इस दौर की असली परीक्षा यह नहीं है कि हमारी मशीनें कितनी स्मार्ट हो गई हैं। असली परीक्षा यह है कि क्या सबसे गरीब जिले में सबसे सस्ता फोन इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति को भी वही एक्सेस, सुरक्षा और अवसर मिलते हैं, जो बाकी सभी को मिलते हैं।

भारतीय संसद का प्रतिनिधित्व करने के लिए नामित

बता दें कि राघव चड्ढा को 12वें इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन (IPU) ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑफ यंग पार्लियामेंटेरियन्स में भारतीय संसद का प्रतिनिधित्व करने के लिए नामित किया गया था। यह सम्मेलन 4 से 6 सितंबर तक उज्बेकिस्तान के समरकंद में आयोजित किया जा रहा है।

इससे पहले, नामांकन पर आभार व्यक्त करते हुए राघव चड्ढा ने एक्स पर कहा, “समरकंद, उज्बेकिस्तान में 4 से 6 सितंबर तक आयोजित होने वाले 12वें इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑफ यंग पार्लियामेंटेरियन्स में भारतीय संसद का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना जाना मेरे लिए सम्मान की बात है। इस प्रतिनिधिमंडल के लिए मुझे नामित करने के लिए माननीय उपराष्ट्रपति जी का आभार।”

इस वैश्विक मंच के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बीजेपी सांसद ने बताया कि 1889 में स्थापित और जिनेवा में मुख्यालय वाला IPU दुनिया की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी राष्ट्रीय संसदों की संस्था है। इसमें 180 सदस्य संसद और 15 एसोसिएट सदस्य शामिल हैं।

इस वर्ष के सम्मेलन के मुख्य विषय के बारे में राघव चड्ढा ने बताया था, “इस वर्ष की थीम है- ‘अशांत समय में सभी के लिए मानवाधिकार, न्याय और गरिमा को फिर से स्थापित करना।’ तीन दिनों तक दुनिया भर के युवा सांसद संघर्ष की परिस्थितियों में युवाओं के अधिकार, डिजिटल अधिकार और ऑनलाइन सुरक्षा, जलवायु लचीलापन एवं न्याय तथा युवाओं के लिए आर्थिक अवसर जैसे मुद्दों पर चर्चा करेंगे।”

उन्होंने वैश्विक मंच पर भारत की लोकतांत्रिक ताकत और युवा आबादी का जिक्र करते हुए कहा, “भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में से एक है। इन सभी मुद्दों पर हमारी संसद के पास दुनिया को देने के लिए बहुत कुछ है और सीखने के लिए भी बहुत कुछ है।”

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Author: vatsalyanews

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