RBI का बैंकों पर बड़ा शिकंज, अब कैपिटल बचाने के लिए नहीं कर सकेंगे फर्जी हेराफेरी; जारी हुए कड़े नियम

RBI ने बैंकों के लिए मार्केट रिस्क और कैपिटल जरूरतों से जुड़े नियमों को और सख्त कर दिया है। नए निर्देशों के तहत बैंक सिर्फ अपनी कैपिटल जरूरत कम दिखाने के मकसद से किसी इंस्ट्रूमेंट को ट्रेडिंग बुक से बैंकिंग बुक या इसके उलट री-क्लासिफाई नहीं कर सकेंगे। RBI का यह कदम नियमों में पारदर्शिता बढ़ाने और बैंकों के जोखिम की सही तस्वीर सामने रखने के उद्देश्य से है।

RBI ने सोमवार को बैंकों के लिए मार्केट रिस्क से जुड़े नए नियम जारी किए हैं। नए नियम के मुताबिक, बैंक सिर्फ अपनी कैपिटल जरूरत कम करने के लिए किसी इंस्ट्रूमेंट को ट्रेडिंग बुक से बैंकिंग बुक या बैंकिंग बुक से ट्रेडिंग बुक में नहीं डाल सकेंगे। आसान शब्दों में कहें तो बैंक अपनी सुविधा के हिसाब से किसी इंस्ट्रूमेंट की कैटेगरी बदलकर कम पूंजी रखने का तरीका नहीं अपना सकेंगे। इससे बैंकों के जोखिम और उन्हें कितनी पूंजी रखनी है, इसकी गणना ज्यादा साफ और पारदर्शी तरीके से होगी।

1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे नियम

RBI के नए निर्देश 1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे। बैंकिंग सेक्टर को नए नियमों के अनुसार तैयारी करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया है। ये नियम सभी कमर्शियल बैंकों पर लागू होंगे। हालांकि, स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट बैंक और लोकल एरिया बैंक को इन निर्देशों के दायरे से बाहर रखा गया है।

मार्केट रिस्क की गणना के लिए नया तरीका

RBI के मुताबिक बैंकों को मार्केट रिस्क के लिए सिंपलीफाई स्टैंडर्ड अप्रोच (SSA) अपनाना होगा। इसके आधार पर बैंक यह तय करेंगे कि जोखिम को देखते हुए कितनी पूंजी रखना जरूरी है। नए नियमों का उद्देश्य Basel III के संशोधित फ्रेमवर्क के साथ भारतीय बैंकिंग नियमों को बेहतर तरीके से जोड़ना भी है। RBI ने कहा है कि नए निर्देशों में नियमों को सरल रखने के साथ-साथ बैंकों को इन्हें अपनाने में सुविधा देने पर भी ध्यान दिया गया है।

ब्याज दर का जोखिम के नियम भी बदले

RBI ने ब्याज दर के जोखिम से जुड़े स्पेशल रिस्क टेबल में भी बदलाव किया है। इन्हें बैंकिंग पर्यवेक्षण पर बेसल समिति (BCBS) के दिशानिर्देशों के अनुरूप किया गया है। नए फ्रेमवर्क में इस जोखिम को ज्यादा साफ और संक्षिप्त तरीके से देखा जाएगा।

डेट म्यूचुअल फंड और ETF पर भी नया नियम

ट्रेडिंग बुक में रखे डेट म्यूचुअल फंड और ETF के लिए भी नियम बदले गए हैं। अब बैंक इन पर कैपिटल की गणना करते समय सिर्फ फंड को नहीं, बल्कि उसमें मौजूद निवेश से जुड़े असल जोखिम को भी ध्यान में रखेंगे।

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Author: vatsalyanews

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