सावधानी: क्या आप जो आम का जूस पी रहे हैं, वह असली है या फिर एक ‘केमिकल कॉकटेल’? क्या बाज़ार में सस्ते जूस के नाम पर सेहत से समझौता किया जा रहा है?

वात्सल्यम समाचार,

पूजा ठक्कर – मुंडारा कच्छ।

सावधानी: क्या आप जो आम का जूस पी रहे हैं, वह असली है या एक ‘केमिकल कॉकटेल’? बाज़ार में सस्ते जूस के नाम पर क्या आपकी सेहत से खिलवाड़ हो रहा है?

मुंडारा, तारीख 7:

जहां एक ओर गुजरात में खाद्य एवं औषधि नियंत्रण प्रशासन (Food and Drugs Control Administration) हाल ही में नकली पनीर और एनालॉग पनीर बेचने वाली दुकानों के खिलाफ एक सख्त अभियान चला रहा था, वहीं अब गर्मियों के मौसम में ‘फलों का राजा’ माने जाने वाले आम के जूस में मिलावट का डर भी ज़ोर पकड़ने लगा है। जब बाज़ार में अच्छी क्वालिटी के आमों की कीमत 250 से 300 रुपये प्रति किलो है, तो उपभोक्ताओं के मन में कई सवाल उठ खड़े हुए हैं, जब वे देखते हैं कि बना-बनाया जूस सिर्फ़ 180 से 200 रुपये में बिक रहा है।

सस्ता जूस और मिलावट का गणित:

विशेषज्ञों के अनुसार, एक किलो आम से केवल 400 से 500 ग्राम शुद्ध जूस ही निकलता है। इस हिसाब से देखें तो, आम की कीमत से भी सस्ता जूस बेचना व्यावहारिक रूप से असंभव है। मुनाफ़ा कमाने के इस खेल में, यह जानकारी सामने आई है कि कुछ असामाजिक तत्व सस्ते कद्दू और पपीते को उबालकर उन्हें आम के जूस में मिला रहे हैं। इस मिश्रण को प्राकृतिक स्वाद देने के लिए, इसमें भारी मात्रा में चीनी, सैकरीन और कृत्रिम मिठास (artificial sweeteners) मिलाई जाती है।

‘कृत्रिम रंग और एसेंस’ सेहत के लिए खतरनाक:

न केवल मिश्रण में मिलावट की जा रही है, बल्कि ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए जूस को गहरा लाल-पीला रंग देने हेतु खतरनाक कृत्रिम रंगों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, और आम जैसी खुशबू लाने के लिए रासायनिक एसेंस का उपयोग किया जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ऐसे रसायन-युक्त पदार्थों का सेवन करने से “किडनी और लिवर” जैसे महत्वपूर्ण अंगों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग:

कच्छ सहित पूरे राज्य भर के जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि खाद्य एवं औषधि नियंत्रण प्रशासन इस मामले में सैंपल लेकर जांच करे। विशेष रूप से कच्छ में, कर्मचारियों की कमी के चलते, यह प्रबल इच्छा व्यक्त की जा रही है कि स्थानीय नगरपालिका के स्वच्छता प्रभारी (Sanitary In-charge) इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाएं और छापेमारी करें।

उपभोक्ताओं के लिए सलाह:

* सिर्फ़ इसलिए आम का जूस न खरीदें क्योंकि वह सस्ता मिल रहा है।

* हमेशा किसी भरोसेमंद और जाने-माने विक्रेता से ही खरीदें।

* जहां तक ​​संभव हो, ताज़े आम घर लाकर खुद जूस बनाने पर ही ज़ोर दें। अपनी और अपने परिवार की सेहत से कोई समझौता न करें और मिलावटी चीज़ों से सावधान रहें।

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