Rajat Sharma’s Blog | विपक्ष जांबाज कैप्टन की तारीफ से क्यों कतराया?

फ्लाईदुबई के आतंकी ओमानी पायलट हमाम अल-हम्मामी के खौफनाक इरादों के बारे में नये राज पता चले हैं। उसके खतरनाक इरादों की पूरी कुंडली सामने आ गई है। ये ओमानी पायलट एक ट्रेंड जिहादी है। उसने पहले भी एक बार इसी तरह विमान क्रैश कराने की कोशिश की थी, लेकिन उस प्लेन में उसका कोई करीबी सफर कर रहा था और उसने इरादा छोड़ दिया। इंसानियत के इस दुश्मन से UAE की agencies पूछताछ कर रही हैं। इस शैतान ने पूछताछ में जो खुलासे किए हैं, वो हैरान करने वाले हैं। वह इजरायल जाने वाली फ्लाइट को क्रैश कराने की प्लानिंग कई साल से कर रहा था। ऐसी एयरलाइन में पायलट बनना चाहता था, जो इजरायल तक जाती हो।

हम्मामी ने पूरी प्लानिंग के साथ Flydubai में नौकरी हासिल की। भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार ने इजरायल के पीएम नेतन्याहू को बताया कि हम्मामी नमाज के बहाने cockpit में अपनी सीट से उठा, उसने नमाज पढ़ी और उसके बाद कैप्टन स्मित पर crash axe से हमला किया। कैप्टन स्मित ने नेतन्याहू को फोन पर बताया कि जब प्लेन को टेकऑफ हुए कुछ घंटे हो गए तब को-पायलट ने नमाज पढ़ने की इच्छा जाहिर की। स्मित ने उसकी बात पर भरोसा किया और उसे नमाज के लिए जगह दी, दूसरी तरह मुड़ गए और अपना काम करने लगे। लेकिन कुछ ही मिनट बाद उनके सिर पर पीछे से जोरदार हमला हुआ। जब तक स्मित कुछ समझ पाते, हम्मामी कुल्हाड़ी से उस पर लगातार तब तक वार करता रहा, जब तक कि स्मित अपनी सीट से नीचे नहीं गिर गए।

स्मित ने इजरायली पीएम को बताया कि जब वो घायल होकर नीचे गिर गए, काफी खून बह चुका था, बेहोशी जैसी हालत हो गई थी, सबकुछ धुंधला-सा नजर आ रहा था, लेकिन स्मित ये समझ रहे थे कि प्लेन नीचे की तरफ जा रहा है, हम्मामी प्लेन को क्रैश कराने जा रहा है। तब स्मित ने पूरी हिम्मत जुटाकर कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया, लेकिन हम्मामी ने दोबारा गेट बंद कर दिया और उस पर फिर से हमला किया। स्मित ने यात्रियों की जान बचाने के लिए एक बार फिर हिम्मत जुटाई और दोबारा कॉकपिट का गेट खोल दिया, इस बार दरवाजा खुलते ही यात्री अंदर घुस गए और हमलावर को दबोच लिया।

तो ये थे खतरे के वो चंद पल। इंसानियत शर्मसार हो चुकी थी। इंसानियत का जज्बा दिखाने वालों ने प्लेन को गिरने से बचा लिया और 180 जानें बच गई। फिलहाल, अल-हम्मामी संयुक्त अरब अमीरात की जेल में है, यूएई की पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। लेकिन बेंजामिन नेतन्याहू ने कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि ओमान के साथ इजरायल के कूटनीतिक संबंध नहीं हैं, तो ओमानी पायलट को प्लेन चलाने की अनुमति कैसे दी गई। नेतन्याहू ने कहा है कि आतंकी हमले की कोशिश के पीछे हम्मामी अकेला नहीं था, इसलिए इजरायल इस घटना की पूरी तह तक जाएगा। हम्मामी को लेकर Australian Counter-Terrorism Unit भी जांच में जुटी हुई है। हम्मामी ने 10 साल पहले ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में RMIT यूनिवर्सिटी पढाई की थी। पढ़ाई के दौरान ही हम्मामी कट्टरपंथियों के प्रभाव में आया। वहीं उसे जिहाद के लिए तैयार किया गया था। इजराइल के लोग 9/11 जैसे टेरर अटैक को बचाने वाले कैप्टन स्मित की बहादुरी को सलाम कर रहे हैं। इजरायल की सड़कों पर बड़े-बड़े बिलबोर्ड्स लगे हैं जिन पर कैप्टन स्मित की फोटो है और हिंदी में लिखा है, “धन्यवाद नायक”। ऐसे बिलबोर्ड तेल अवीव, येरूशलम हाईफा जैसे कई शहरों में दिखाई दे रहे हैं। नेतन्याहू ने कैप्टन स्मित की हिम्मत की दाद दी, इजरायल के लोगों की जान बचाने के लिए शुक्रिया अदा किया, कैप्टन स्मित को इजरायल आने का आमंत्रण दिया। नेतन्याहू ने कैप्टन स्मित मच्छार से कहा कि वो चाहते हैं कि कैप्टन स्मित इजरायल के स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होकर पारंपरिक जश्न की मशाल जलाएं। कैप्टन स्मित का यूएई के मिलिट्री हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है। वो तेजी से रिकवर कर रहे हैं। इसमें कोई शक नहीं हम्मामी का इरादा खतरनाक था। वो तीन साल से प्लानिंग कर रहा था। उसका इरादा 180 लोगों की जान लेने से कहीं ज्यादा खौफनाक, कहीं ज्यादा बड़ा था। वो इजरायल के तेल अवीव एयरपोर्ट पर प्लेन को क्रैश कराना चाहता था।

अगर भारत का बहादुर Pilot स्मित अपनी जान की बाजी ना लगाता तो सोचिए कितना बड़ा हादसा होता। इसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। इसका सच कभी बाहर न आता। दुख की बात है कि हम्मामी ने कैप्टन स्मित से नमाज पढ़ने के लिए वक्त मांगा, नमाज के बहाने उसने स्मित पर पीठ पीछे से वार किया। कैप्टन स्मित ने हनुमान जी को याद किया, हनुमान चालीसा का पाठ किया। न सिर्फ 180 लोगों की जान बचाई, बल्कि अगर प्लेन तेल अवीव एयरपोर्ट पर क्रैश होता तो ना जाने कितने और लोगों की जान चली जाती। जिस कैप्टन स्मित को पूरी दुनिया सलाम कर रही है, हमारे अपने मुल्क में कुछ लोग उसकी तारीफ करने से कतरा रहे हैं। स्मित की बहादुरी पर राहुल गांधी का कोई बयान नहीं आया। कांग्रेस पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल्स पर कैप्टन स्मित को कोई जगह नहीं मिली। सिर्फ कांग्रेस ही नहीं विपक्ष के ज्यादातर नेता कैप्टन स्मित की जांबाजी पर खामोश हैं। मैं हैरान हूं कि स्मित की बहादुरी को भी कुछ लोगों ने हिंदू-मुसलमान में बांट दिया, फलस्तीन और इजरायल में बांट  दिया। जिस pilot ने ईश्वर का दूत बनकर 180 लोगों की जान बचाई, उसकी प्रशंसा करने में कुछ लोगों को तकलीफ क्यों है? क्या इसलिए कि जिसने उस पर हमला किया, वह मुसलमान था? क्या इसलिए कि कैप्टन स्मित ने हनुमान जी का नाम लिया? क्या इसलिए कि स्मित ने इजरायली यात्रियों की जान बचाई? क्या इजरायली इंसान नहीं हैं? हो सकता है किसी को इन सब बातों से दिक्कत हो, किसी की राजनीतिक मजबूरी हो, पर क्या हम एक भारतीय के पराक्रम पर गर्व नहीं कर सकते? और करते हैं तो उसे कह नहीं सकते? इस भारतीय पायलट की वजह से आज पूरी दुनिया में भारत का मान बढ़ा है, हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हुआ है। राजनीति के लिए, वोट बैंक के लिए, उसकी प्रशंसा से बचना एक लफ्ज भी ना कहना, दुर्भाग्यपूर्ण है।

CEC के केस में सुप्रीम कोर्ट पर इकतरफा आदेश जारी करने के लिए दबाव क्यों?

सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने से साफ इंकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया जा सकता। अर्जी में आरोप लगाया गया था कि CEC ज्ञानेश कुमार मनमाने ढंग से काम कर रहे हैं, उन्होंने SIR से जुड़े 14 ऐसे फैसले लिए जिन पर बाकी दो इलेक्शन कमिशनर्स ने असहमति जाहिर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, CEC ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी, डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर मनीष गर्ग और DG-IT सीमा खन्ना को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की बेंच ने कहा कि अगर ये साबित होता है कि चुनाव आयोग ने फैसले बिना आम-सहमति के लिए हैं, तो उन्हें वापस लिया जा सकता है लेकिन इससे पहले चुनाव आयोग का जवाब और रिकॉर्ड देखना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि अदालत ने Form-6 के किसी भी संशोधन को मंजूरी नहीं दी है। इसलिए ये देखा जाएगा कि इसमें बदलाव कैसे हुए। दरअसल, 9 दिन पहले चुनाव आयोग ने कहा था कि SIR के लिए Form-6 के साथ लगाए गए डिक्लेरेशन को सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी मिली है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे गलत करार दिया। चूंकि इस मामले में ज्यादा चर्चा इसलिए हो रही है, क्योंकि रविवार को सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने कह दिया कि ऐसी कोई भी प्रक्रिया मनमानी है, जो लाखों भारतीयों को वोटिंग के अधिकार से वंचित कर दे, ये संविधान की आत्मा पर हमला है, इसे कोई भी कोर्ट न्यायोचित नहीं ठहरा सकता। जस्टिस भुइयां के इस बयान को कांग्रेस और दूसरे विरोधी दल हाथों हाथ ले रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने वही किया जो नॉर्मल है, जो होना चाहिए। केवल अखबार की रिपोर्ट के आधार पर कोई एक्शन लेने की बजाए CEC और दोनों ECs से पूछा कि मामला क्या है? पर बहुत सारे वकील हैं, activists हैं, जो सुप्रीम कोर्ट पर दबाव  बनाते हैं। हर केस में दूसरों को सुने बगैर ऑर्डर न देने की दुहाई देते हैं, लेकिन अपने केस में चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट तुरंत ऑर्डर दे दे, दूसरे पक्ष की परवाह न करे।

ये दोहरा मापदंड क्यों?

इसका एक और पक्ष है। यही वकील कहते हैं कि जब कोई मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने है तो सरकार ऐसा कोई कदम न उठाए जो इस फैसले को प्रभावित कर सके, लेकिन यही लोग अपने मामले में सड़क पर उतरकर प्रेशर बनाने की कोशिश को गलत नहीं मानते। सुनवाई से एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट के एक सिटिंग जज ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए तो केस फाइल करने वाले गदगद हो गए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट का कोई सिटिंग जज अगर इसी तरह एक दिन पहले चुनाव आयोग के काम को सर्पोट कर देता, उसके पक्ष में भाषण दे देता तो यही activist आसमान सिर पर उठा लेते। कानून सबके लिए बराबर है, इसलिए अब चुनाव आयोग का विरोध करने वालों को अपने सारे तर्क और सारे दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट के सामने रखना चाहिए, ताकि सच सामने आए।

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 05 अक्टूबर, 2026 का पूरा एपिसोड

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Author: vatsalyanews

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