मोरबी शहर में आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे पर सोशल एक्टिविस्ट ने कमिश्नर को लिखकर ज्ञापन दिया।
मोरबी के सोशल एक्टिविस्ट राजूभाई दवे, जगदीशभाई बंभानिया, राणेवाडिया देवेश मेरुभाई, गिरशभाई छबीलभाई कोटेचा वगैरह ने म्युनिसिपल कमिश्नर को लिखकर ज्ञापन दिया, जिसमें म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की बड़ी लापरवाही पर गुस्सा जताया गया। ज्ञापन के मुताबिक, मोरबी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन को एक साल पूरा होने के बाद भी आज तक आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए एक भी गाड़ी नहीं लगाई गई है। गाय और बकरियों को पकड़ने का इंतज़ाम होने के बावजूद, कुत्तों के खिलाफ कोई असरदार कार्रवाई नहीं होने से लोगों में बहुत गुस्सा है।
म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफिस के ग्राउंड में भी कुत्ते खुलेआम घूमते दिखते हैं, जो एक गंभीर स्थिति को दिखाता है। साल 2025 के दौरान मोरबी शहर में कुत्तों के काटने के कुल 4579 मामले सामने आए, जबकि पता चला है कि पूरे साल में कुत्तों के काटने के 6000 से ज़्यादा मामले सामने आए। इसके अलावा, 2026 के सिर्फ़ आठ से दस दिनों में 250 डॉग बाइट के मामले सामने आने से स्थिति और भी चिंताजनक हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने भी राज्य सरकारों को कुत्तों के आतंक को कंट्रोल करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन शिकायत की गई है कि मोरबी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की तरफ़ से कोई असरदार काम नहीं किया जा रहा है। इसके साथ ही, समाजसेवियों ने मांग की है कि आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए तुरंत एक स्पेशल टीम बनाई जाए। नियमों के मुताबिक वैक्सीनेशन और नसबंदी की प्रक्रिया को लागू करने के लिए ज़रूरी ट्रेंड स्टाफ़, उपकरण और गाड़ियां उपलब्ध कराई जाएं। अगर समय पर कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले समय में और भी गंभीर घटनाएं हो सकती हैं, जिसकी पूरी ज़िम्मेदारी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की होगी।









