अमेरिका में ग्रीन कार्ड पाने का रास्ता हुआ महंगा, US ने EB-5 प्रोग्राम की फीस में की भारी बढ़ोतरी; भारतीयों पर पड़ेगा सीधा असर

अमेरिका में निवेश के जरिए ग्रीन कार्ड पाने की योजना बना रहे भारतीयों के लिए बड़ा बदलाव होने जा रहा है। यूएस सिटिनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसे (USCIS) ने EB-5 इमीग्रेंट इन्वेस्टर प्रोग्राम की कई फीस में भारी बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। नए नियम 30 नवंबर 2026 से लागू होंगे। इससे अमेरिका में निवेश करके स्थायी निवास हासिल करने की कोशिश कर रहे भारतीय उद्यमियों और परिवारों की लागत बढ़ जाएगी।

EB-5 प्रोग्राम के तहत अकेले निवेश करने वाले आवेदकों के लिए फॉर्म I-526 की फीस 3,675 डॉलर से बढ़कर 7,615 डॉलर हो जाएगी। वहीं, रीजनल सेंटर के जरिए निवेश करने वाले लोगों के फॉर्म I-526E की फीस 3,675 डॉलर से बढ़कर 7,850 डॉलर हो जाएगी। इन शुरुआती याचिकाओं पर 75 डॉलर की टेक्नोलॉजी फीस भी लगेगी। ग्रीन कार्ड पर लगी शर्तों को हटाने के लिए दाखिल किए जाने वाले फॉर्म I-829 की फीस भी 3,750 डॉलर से बढ़कर 5,000 डॉलर हो जाएगी।

रीजनल सेंटर्स के लिए भी बढ़ी फीस

नए नियमों में रीजनल सेंटर्स  से जुड़ी फीस में भी बड़ा बदलाव किया गया है। Form I-956 के जरिए रीजनल सेंटर की मान्यता लेने की फीस 17,795 डॉलर से बढ़कर 44,115 डॉलर हो जाएगी। वहीं, फॉर्म I-956F की फीस बढ़कर 42,675 डॉलर हो जाएगी। USCIS के अनुसार, एजेंसी अपनी गतिविधियों का बड़ा हिस्सा आवेदन फीस से मिलने वाली रकम से चलाती है। इसमें आवेदन की जांच, बैकग्राउंड चेक, पात्रता की पुष्टि और धोखाधड़ी रोकने जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं।

EB-5 प्रोग्राम क्या है?

EB-5 के जरिए विदेशी निवेशक अमेरिका में किसी योग्य कारोबारी परियोजना में निवेश करके और कम से कम 10 फुल-टाइम नौकरियां पैदा करके स्थायी निवास के लिए पात्र बन सकते हैं। मौजूदा नियमों के तहत सामान्य निवेश की न्यूनतम राशि 10.5 लाख डॉलर, जबकि लक्षित रोजगार क्षेत्र या इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में 8 लाख डॉलर है। इस प्रोग्राम में निवेशक के साथ उसके पति या पत्नी और योग्य बच्चे भी ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं।

भारतीयों के लिए क्यों अहम है बदलाव?

पिछले कुछ वर्षों में भारत से EB-5 के लिए मांग काफी बढ़ी है। इसके चलते भारतीय आवेदकों के लिए बैकलॉग भी बना हुआ है, जिससे ग्रीन कार्ड के लिए इंतजार का समय प्रभावित हो सकता है। अब आवेदन फीस में बड़ी बढ़ोतरी से भारतीय निवेशकों की कुल इमिग्रेशन लागत और बढ़ने की संभावना है। हालांकि, फीस बढ़ने के बावजूद निवेश की मूल पात्रता और रोजगार सृजन की शर्तें अलग नियमों के तहत लागू रहेंगी।

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Author: vatsalyanews

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