दुनिया की दो शक्तियों का होगा महामिलन? पत्नी संग ट्रंप से मिलने “खास विमान” से रवाना हुए शी जिनपिंग

Highlights

  • ट्रंप और शी जिनपिंग की होगी मुलाकात
  • शी जिनपिंग पत्नी सहित अमेरिका रवाना
  • आखिर क्यों अहम है ये मुलाकात

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग बुधवार को अमेरिका के लिए रवाना हुए, जहां गुरुवार को उनकी मुलाकात राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से होनी है। यह बहुप्रतीक्षित बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देश ज़्यादा सक्षम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम को लेकर बढ़ती चिंताओं का सामना कर रहे हैं और दोनों पक्ष व्यापार को लेकर तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं। शी जिनपिंग अपने “खास विमान” से बीजिंग से वॉशिंगटन के लिए रवाना हुए हैं। सरकारी ब्रॉडकास्टर CCTV के मुताबिक, चीनी नेता के साथ उनकी पत्नी पेंग लियुआन, उनके करीबी सहयोगी काई ची और विदेश मंत्री वांग यी समेत कई लोग अमेरिका जाने वाले विमान में सवार थे।

अमेरिका में शी का स्वागत करेंगे ट्रंप


व्हाइट हाउस के मुताबिक, गुरुवार को होने वाली औपचारिक बातचीत से पहले ट्रंप खुद जॉइंट बेस एंड्रयूज पर चीनी राष्ट्रपति का स्वागत करेंगे। शी जिनपिंग और उनकी पत्नी व्हाइट हाउस में स्वागत समारोह में शामिल होंगे, जिसमें मिलिट्री फ्लाईओवर भी होगा। इसके बाद ट्रंप और शी बातचीत करेंगे और फिर ट्रंप चीनी राष्ट्रपति के लिए स्टेट डिनर (आधिकारिक भोज) आयोजित करेंगे। शी जिनपिंग का यह अमेरिका दौरा शुक्रवार को खत्म होगा, जब दोनों देशों के राष्ट्रपति और उनकी पत्नियां व्हाइट हाउस में चाय पर मिलेंगी और नेशनल आर्काइव्स का दौरा करेंगी। व्हाइट हाउस ने इस दौरे को “दोनों देशों के रिश्तों में एक अहम पड़ाव” बताया है।

ट्रंप शी की मुलाकात क्यों है खास?

ट्रंप ने संकेत दिया है कि शी जिनपिंग के साथ बातचीत में कई तरह के मुद्दों पर चर्चा हो सकती है; उन्होंने कहा कि वे शी के साथ “लगभग हर चीज़ पर चर्चा” करेंगे। जानकारी के मुताबिक दोनों नेताओं के बीच बातचीत में कई विवादित मुद्दों के भी शामिल होने की उम्मीद है, जिनमें अमेरिका-चीन व्यापार संबंध, ताइवान को लेकर तनाव और ईरान के प्रति वॉशिंगटन की नीति शामिल हैं। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अमेरिकी टैरिफ के असर को लेकर बातचीत कर रही हैं, जबकि ताइवान पर बीजिंग का रुख असहमति का एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है।

चीन बातचीत में अपनी बढ़त बनाने के लिए रेयर अर्थ और दूसरे ज़रूरी खनिजों पर अपने कंट्रोल का इस्तेमाल भी कर सकता है। बीजिंग ने पहले भी इन चीज़ों के एक्सपोर्ट पर कड़े नियम लागू किए हैं, जो कई हाई-टेक इंडस्ट्रीज़ के लिए बहुत ज़रूरी हैं। बातचीत में वॉशिंगटन की तरफ़ से उठाए गए कुछ खास मामलों पर भी चर्चा हो सकती है। 

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Author: vatsalyanews

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