मोरबी ज़िले में हज़ारों लोगों ने याचिका पर हस्ताक्षर कर यह मांग की है कि गाय को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा दिया जाए।

मोरबी: मोरबी ज़िले में हज़ारों लोगों ने याचिकाएँ साइन करके यह माँग की है कि गाय को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा दिया जाए।

‘गौ सम्मान आह्वान अभियान’ के तहत, मोरबी में डिप्टी कलेक्टर को और टंकारा, वांकानेर और मालिया (M.) में मामलतदारों को याचिकाएँ सौंपी गई हैं।

मोरबी: पूरे भारत में चल रहे ‘गौ सम्मान आह्वान अभियान’ के तहत, मोरबी ज़िले में भी गौ भक्तों, संतों और जागरूक नागरिकों ने गौ माता की सुरक्षा और सम्मान के लिए अपनी आवाज़ उठाई है। हज़ारों लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को याचिकाएँ साइन करके यह माँग की है कि गाय को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा दिया जाए और गाय के बछड़ों की हत्या और तस्करी को रोकने के लिए सख़्त केंद्रीय कानून बनाए जाएँ। याचिका में गाय की नस्ल की सुरक्षा के लिए 8 मुख्य माँगें की गई हैं:

1. एकीकृत केंद्रीय कानून और स्वतंत्र मंत्रालय: गायों की हत्या पर पूरी तरह रोक लगाने और सख़्त कार्रवाई के लिए ‘केंद्रीय गौ सेवा और संरक्षण अधिनियम’ लागू किया जाए और एक अलग केंद्रीय मंत्रालय बनाया जाए।

2. संवैधानिक सर्वोच्चता: देसी गाय की नस्ल को ‘राष्ट्रमाता’ या ‘राष्ट्र आराध्या’ के रूप में आधिकारिक संवैधानिक मान्यता दी जाए।

3. सख़्त दंडात्मक प्रावधान: गाय की तस्करी और गाय की हत्या को गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध बनाया जाए, दोषी को आजीवन कारावास और उसकी संपत्ति ज़ब्त करने का प्रावधान हो।

4. आर्थिक आत्मनिर्भरता: खेती में जैविक खाद और दवा के रूप में ‘पंचगव्य’ के इस्तेमाल को बढ़ाया जाए; मिड-डे मील और मंदिरों में चढ़ावे के लिए सिर्फ़ देसी गायों के घी और दूध का इस्तेमाल अनिवार्य किया जाए।

5. स्थानीय स्तर पर गौ-पालन: हर ग्राम पंचायत में ‘नंदीशाला’ और ज़िला स्तर पर कम से कम 1 ‘आदर्श गौ अभयारण्य’ बनाया जाए।

6. हाईवे सुरक्षा और चिकित्सा देखभाल: राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर हर 50 से 100 km की दूरी पर ‘गौ-वाहिनी’ एम्बुलेंस और 150 से 200 km की दूरी पर आधुनिक ट्रॉमा सेंटर स्थापित किए जाएँ।

7. शिक्षा और सामाजिक सुधार: स्कूली पाठ्यक्रम में ‘गौ-विज्ञान’ विषय को शामिल किया जाए। 8. चारा और चरागाह भूमि संरक्षण नीति: औद्योगिक उपयोग पर रोक लगाने और सभी चरागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए ‘चारा सुरक्षा अधिनियम’ बनाना।

आवेदन जमा करते समय उपस्थित नेता एवं गौभक्त:

मोरबी में आवेदन के दौरान नकलंग धाम के महंत दामजी भगत, विश्व हिंदू परिषद के जिलेशभाई, यदुनंदन गौशाला के कांजीभाई और विपुलभाई प्रजापति मौजूद थे. मालिया में धवलभाई बारासरा, चिरागभाई प्रजापति और दर्शनभाई राठौड़ उपस्थित थे। जबकि टंकारा में टंकारा पांजरापोल के रमेशभाई गांधी, टंकारा गौ शाला मंडप की पूरी टीम, नंदलालभाई परमार, वालमजी जिवानी, धर्मेंद्र त्रिवेदी, भाविन सेजपाल, बिपिन प्रजापति, संजय भागिया, मनियार ब्रदर्स, आनंदजी आर्य, गोपाल कटारिया, युवा वाहिनी के योजी जाडेजा, बाबूलाल सिनोजिया और सत्यराजसिंह जाडेजा और अन्य गौभक्त और वांकानेर में, जगदीशभाई देवकरणभाई प्रजापति, दिनेशभाई मगनभाई प्रजापति, अनिलभाई कुनपरा। पावुभाई राजगोर, शिवाजीभाई राजगोर, दीपकभाई राजगोर, राजूभाई झापाड़ा, रूडी में नकलंक मंदिर के महंत मुकेश भगत, इंदु भगत भालाभगत – शौर्य ठाकर मंदिर, भारतभगत नाथभगत -वसुंधरा ठाकर मंदिर, लालाभगत राताभगत सरकडिया – ठाकर मंदिर, नवघनभाई भवनभाई भरवाड, मच्छूभाई नजाभाई भरवाड, महंत जयश्री गिरि – लिंबाडा (तत्कालीन हनुमान अलखधाम), जादव कानाभाई शोभाला एवं बड़ी संख्या में गौरक्षक उपस्थित थे।

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Author: vatsalyanews

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