बच्चे को डायपर रैश से कैसे बचाएं? डर्मेटोलॉज‍िस्‍ट ने बताया

डायपर रैश शिशुओं में होने वाली एक आम समस्या है। इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि सफाई में कोई कमी रखी गई है या बच्चे को कोई स्किन इंफेक्शन हुआ है। दरअसल छोटे बच्चों की त्वचा बहुत नाजुक और विकसित हो रही होती है, जिससे उसमें नमी, रगड़ और जलन का असर जल्दी होता है। डॉक्टर बताते हैं कि जब बच्चे की त्वचा लंबे समय तक नमी के संपर्क में रहती है, तो वह संवेदनशील हो जाती है। सुसु और पॉटी त्वचा की सुरक्षा परत को नुकसान पहुंचाते हैं। टाइट डायपर की रगड़ इस जलन को और बढ़ा देती है। ऐसे में डॉ. निधि सिंह, डर्मेटोलॉजिस्ट, ग्लेनेगल्स हेल्थसिटी बता रही हैं कि बच्चे को रैश से कैसे बचा सकते हैं। 

क्या कहते हैं डॉक्टर 

डायपर समय पर बदलें: यह सोच गलत है कि डायपर केवल भारी होने पर ही बदला जाए। पॉटी करने के तुरंत बाद और गीला होने पर नियमित रूप से डायपर बदलें।

सफाई का सही तरीका: बहुत ज्यादा धोने, रगड़ने या खुशबूदार प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल से त्वचा का नेचुरल ऑयल खत्म हो जाता है। गुनगुने पानी या बिना खुशबू/अल्कोहल वाले वाइप्स से हल्के हाथ से सफाई करें। पोछने के बजाय थपथपा कर सुखाएं। नया डायपर पहनाने से पहले कुछ मिनट त्वचा को हवा लगने दें।

क्रीम का इस्तेमाल: जिंक ऑक्साइड या पेट्रोलियम जेली वाली क्रीम की पतली परत लगाएं। यह त्वचा और नमी के बीच एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है।

सही साइज का डायपर: डायपर सही साइज का होना चाहिए। ज्यादा टाइट डायपर से रगड़ लगती है और नमी अंदर फंस जाती है।

इस बात का भी रखें ध्यान


खुशबूदार पाउडर, एंटीसेप्टिक लिक्विड और घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल न करें। ये नाजुक त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के स्टेरॉयड या कॉम्बिनेशन क्रीम बिल्कुल न लगाएं।

डॉक्टर को कब दिखाएं?

अगर रैश बहुत ज्यादा हो, उसमें छाले या मवाद बन जाए, त्वचा की परतों में फैल जाए, या 2-3 दिनों में ठीक न हो, तो तुरंत चर्म रोग विशेषज्ञ को दिखाएं। यह फंगल या बैक्टीरियल इन्फेक्शन भी हो सकता है, जिसके लिए खास इलाज की जरूरत होती है। डायपर रैश से बचाव का सही तरीका बार-बार धोना नहीं, बल्कि त्वचा की सुरक्षा परत को बचाना है। सही समय पर डायपर बदलना, हल्की सफाई और सही क्रीम का इस्तेमाल बच्चे की त्वचा को स्वस्थ और आरामदायक बनाए रखता है।

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Author: vatsalyanews

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