PNB, बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन बैंक समेत कई बैंकों ने महंगा किया लोन, चेक करें नई ब्याज दरें

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा बुधवार को रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद देश के कई बैंकों ने लोन की ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर दी है। बुधवार को रेपो रेट बढ़ाए जाने के बाद पंजाब नेशनल बैंक (PNB), इंडियन बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा समेत कई बड़े बैंकों ने अपनी लोन की ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की घोषणा कर दी है। यानी, इन बैंकों से लोन लेने वाले ग्राहकों के लिए कर्ज महंगा हो जाएगा। 

5.50 प्रतिशत हुआ रेपो रेट

आरबीआई ने बुधवार को रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया। ये करीब 4 साल में पहली बढ़ोतरी है। रिजर्व बैंक ने महंगाई बढ़ने और रुपये में जारी गिरावट के बीच आगे भी रेपो रेट में बढ़ोतरी के संकेत दिए हैं। 

पीएनबी ने RLLR को 8.10 प्रतिशत से बढ़ाकर किया 8.35 प्रतिशत

पीएनबी ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि आरबीआई की रेपो दर बढ़ाए जाने के बाद उसने रेपो से जुड़ी ब्याज दर (RLLR) को 8.10 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.35 प्रतिशत कर दिया है। नई दर 8 अक्टूबर से लागू होगी। हालांकि, देश के दूसरे सबसे बड़े पब्लिक सेक्टर के बैंक पीएनबी ने कहा कि उसकी सीमांत लागत आधारित ऋण दर (MCLR) और आधार दर में कोई बदलाव नहीं किया गया है। 

इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन ओवरसीज बैंक ने बढ़ाई ब्याज दरें

चेन्नई स्थित पब्लिक सेक्टर के इंडियन बैंक ने भी अपनी रेपो से जुड़ी बेंचमार्क ऋण दर (RBLR) को 7.95 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.20 प्रतिशत कर दिया है। बैंक के अनुसार, नई दर 8 अक्टूबर से प्रभावी होगी। बैंक ऑफ बड़ौदा ने अपनी रेपो आधारित ऋण दर को 7.90 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.15 प्रतिशत कर दिया है। बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन ओवरसीज बैंक ने भी अपनी रेपो आधारित ऋण दर (RBLR) को बढ़ाकर 8.35 प्रतिशत कर दिया है। ये नई दरें 8 अक्टूबर से लागू होंगी। 

प्राइवेट सेक्टर के बैंक ने भी महंगा किया लोन

प्राइवेट सेक्टर के तमिलनाड मर्केंटाइल बैंक ने भी अपनी रेपो से जुड़ी ऋण दर को 8.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.50 प्रतिशत कर दिया है। अन्य बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा भी आरबीआई के फैसले के अनुरूप अपनी बेंचमार्क ऋण दरों में बढ़ोतरी किए जाने की उम्मीद है। बताते चलें कि रेपो रेट वो ब्याज दर होती है, जिस पर आरबीआई बैंकों को कर्ज देता है। रेपो रेट बढ़ने से आम तौर पर बैंकों के लिए फंड्स जुटाना महंगा हो जाता है और इसका असर नए कर्ज की ब्याज दरों पर पड़ सकता है।

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Author: vatsalyanews

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